हथेलिओं की लकीरों में सिमटी हुई ज़िन्दगी
उंगलिओं के पोरों पर गिनी हुई ज़िन्दगी
साथ चले तो सफ़र बनती हुई ज़िन्दगी
दूर से देखा तो ज़मीं-आसमान से मिलती हुई ज़िन्दगी
जो मुस्कराए कोई तो कहकहे लगाती हुई ज़िन्दगी
आँख के पानी को समन्दर करती हुई ज़िन्दगी
यही तो है ज़िन्दगी और प्यार भी यही
यही तो है दर्द भी और रात भी यही
खिड़की के पोरों से, रोशनदान के कोनों से
सूरज की किरणों की तरह आती हुई ज़िन्दगी
रात के सन्नाटे में, तारों की चादर तले
चाँद की चांदनी से भीगी हुई ज़िन्दगी
हथेलियों की लकीरों में, उँगलियों की पोरों में सिमटी हुई ज़िन्दगी !!!
उंगलिओं के पोरों पर गिनी हुई ज़िन्दगी
साथ चले तो सफ़र बनती हुई ज़िन्दगी
दूर से देखा तो ज़मीं-आसमान से मिलती हुई ज़िन्दगी
जो मुस्कराए कोई तो कहकहे लगाती हुई ज़िन्दगी
आँख के पानी को समन्दर करती हुई ज़िन्दगी
यही तो है ज़िन्दगी और प्यार भी यही
यही तो है दर्द भी और रात भी यही
खिड़की के पोरों से, रोशनदान के कोनों से
सूरज की किरणों की तरह आती हुई ज़िन्दगी
रात के सन्नाटे में, तारों की चादर तले
चाँद की चांदनी से भीगी हुई ज़िन्दगी
हथेलियों की लकीरों में, उँगलियों की पोरों में सिमटी हुई ज़िन्दगी !!!
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